गणगौर 2020: क्या है मारवाड़ियों के लोकप्रिय त्यौहार गणगौर का महत्व?

गणगौर 2020: क्या है मारवाड़ियों के लोकप्रिय त्यौहार गणगौर का महत्व?
Gangaur 2020

चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तीज को मारवाड़ियों का प्रमुख त्यौहार आता है गणगौर। गणगौर राजस्थान और मध्य प्रदेश का एक लोकप्रिय त्यौहार है। गणगौर के दिन कुंवारी लडकियां एवं विवाहित महिलायें शिवजी और पार्वती जी गौरी की पूजा करती है। पूजा करते समय दूब से पानी के छांटे देते हुए गोर गोर गोमती गीत जाती है। यहा पर गण शिव और गौर पार्वती के इस पर्व में कुंवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने के लिए कामना करती है।

विवाहित महिलाये चैत्र शुक्ल तृतीय को गणगौर पूजन तथा व्रत अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती है।

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गणगौर की पूजा के दौरान बहुत से लोकगीत है जिनका एक अलग ही महत्व है और इस अनूठे पर्व की आत्मा भी है। इस पर्व में गवरजा और ईसर की बडी बहन और जीजाजी के रूप में गीतों के माध्यम से पूजा होती है तथा उन गीतों के बाद अपने परिजनों के नाम लिए जाते हैं। राजस्थान के कई प्रदेशों में गणगौर पूजन एक आवश्यक वैवाहिक रस्म के रूप में भी प्रचलित है।

जो महिलाएं गणगौर का व्रत करती है उन्हें सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। रोजाना की नित्य क्रियाओं से निवृत होने के बाद में साफ़ कपडे पहनने चाहिए।जब गणगौर की पूजा होती है तब कुंवारी कन्याएं सिर पर चुन्नी ओढ़कर घर से बगीचे के लिए निकलती है। वहां पर साफ़ एवं ताजा पानी में लोटे में भरकर उसमे हरी दूब और फूल सजाकर सिर पर मंगल गीत जाती है और घर की ओर प्रस्थान करती है।

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ऐसा करने के बाद में होली की राख या काली मिट्टी से सोलह छोटी पिंडी बनाकर उसे पाटे या फिर चौकी पर रखा जाता है। इसके बाद में पानी छींटे देने के बाद में कुमकुम चावल से पूजा की जाती है।  सबसे पहले चौकी लगाए और उसके ऊपर साथिया बनाकर पूजन किया जाता है। जिसके उपरान्त पानी से भरा हुआ कलश उस पर पान के पांच पत्ते, नारियल रखते है। ऐसे कलश को चौकी के दाहिने ओर रखते है।

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